#उसने कहा था..!! (A love story)

उसने कहा था,
मेरा साथ आखिरी दौर तक निभा पाओगे न ?
उसने कहा था,
चलते चलते कहीं फिसल गये तो पहला हाथ बढाओगे न?
उसने कहा था,
सभी साथ छोड़ भी दें फिर भी साथ दे पाओगे न?
उसने कहा था,
मुझसे कोई गलती हो जाये तो उसे माफ कर पाओगे न?

उसने कहा था,
कभी खुद से ही हार जाऊं तो अपनी हथेली पर उठाओगे न?
उसने कहा था,
जीवन में सर्वस्व अंधेरा छा जाये तो रोशनी बन कर आओगे न?

उसने कहा था,
अच्छा मान ही लो मैं कहीं दूर चली गयी फिर भी मुन्तजिर रह पाओगे न?
उसने कहा था,
कभी जिन्दगी हमसे भद्दा मजाक कर ही दे, तो खुद को टूटने से बचा पाओगे न?
उसने कहा था,
अच्छा मान लो हम साथ नहीं रहे, फिर भी प्रेम को ईर्ष्या तो नहीं बनाओगे न?
उसने कहा था,
ईशान, हमारे चले जाने के बाद , ये ईश्क दोबारा तो कर पाओगे न?

: ईशान

#वृन्दावन धाम ♥️

प्रिय पाठकों कल मुझे वृन्दावन धाम जाने का अवसर प्राप्त हुआ, जिसकी कुछ स्मृतियां आप लोगों से शेयर करना चाहता हूं। वृन्दावन में जैसे भक्ति बहती है। मुझे वहां जाके असीम शांति और भक्ति की प्राप्ति होती है।

राधा संग बांके बिहारी जी♥️

(Source :- Internet)

##
धन-धन वृन्दावन रजधानी।
जहाँ विराजत मोहन राजा श्री राधा महारानी।
सदा सनातन एक रस जोरी महिमा निगम ना जानी।
श्री हरि प्रिया हितु निज दासी रहत सदा अगवानी

विश्व के सभी स्थानों में श्री धाम वृन्दावन का सर्वोच्च स्थान माना गया है। वृन्दावन का आध्यात्म अर्थ है- “वृन्दाया तुलस्या वनं वृन्दावनं” तुलसी का विषेश वन होने के कारण इसे वृन्दावन कहते हैं। वृन्दावन ब्रज का हृदय है जहाँ प्रिया-प्रियतम ने अपनी दिव्य लीलायें की हैं। इस दिव्य भूमि की महिमा बड़े-बड़े तपस्वी भी नहीं समझ पाते। ब्रह्मा जी का ज्ञान भी यहाँ के प्रेम के आगे फ़ीका पड़ जाता है। वृन्दावन रसिकों की राजधानी है यहाँ के राजा श्यामसुन्दर और महारानी श्री राधिका जी हैं। इसमें तनिक भी सन्देह नहीं है कि वृन्दावन का कण-कण रसमय है। वृन्दावन श्यामसुन्दर की प्रियतमा श्री राधिका जी का निज धाम है। विद्वत्जन श्री धाम वृन्दावन का अर्थ इस प्रकार भी करते हैं “वृन्दस्य अवनं रक्षणं यत्र तत वृन्दावनं” जहाँ श्री राधारानी अपने भक्तों की दिन-रात रक्षा करती हैं, उसे वृन्दावन कहते हैं।

♥️ राधे-राधे♥️

#हम आशा करते हैं ..!!

#Article370revoked
जब तक खुद के घर में पड़ोसी का हस्तक्षेप रहेगा तब तक आपके घर में अमन चैन कभी नहीं हो सकती। जब कभी घाव नासूर बन जाये तो शुरुआत की उपचार दर्द देने वाली होती है परन्तु वह आपके फायदे के लिए ही होती है । हमें उम्मीद है कि जम्मू-कश्मीर देश की मुख्य धारा में जल्द ही शामिल होगा ओर विकास की ओर तीव्र गति से उन्मुख होगा।